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नवंबर, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्रभक्ति का चूरन

धर्म के क्षेत्र में भक्ति आत्मा की मुक्ति का साधन हो सकती है ; परन्तु राजनीति में भक्ति या नायक पूजा पतन और अंततः तानाशाही का सीधा रास्ता है       यह बात बाबा साहेब डॉ0 भीमराव ...

खतरे में क्यों...? अम्बेडकर

भारत रत्न बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर यह कोई एक नाम भर नहीं है , यह प्रतीक है इस देश के 60 करोड़ लोगो के सम्मान का , यह एक विषय है पूरी दुनिया के दलितों , गरीबो, मज़दूरों और महिलाओ के ...

खतरे में क्यों...? अम्बेडकर

भारत रत्न बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर यह कोई एक नाम भर नहीं है , यह प्रतीक है इस देश के 60 करोड़ लोगो के सम्मान का , यह एक विषय है पूरी दुनिया के दलितों , गरीबो, मज़दूरों और महिलाओ के अध्यायो का यह एक परिणाम है शिक्षा की शक्ति का और उस शक्ति के परिणाम का , जहा एक तरफ डॉ0 अम्बेडकर को पूरी दुनिया " सिंबल ऑफ़ नॉलेज" के नाम से संबोधित करती है , वही उनको आधुनिक भारत का जनक भी कहा जाता है । दूसरा कोई ऐसा विद्वान दुनिया में नहीं हुआ होगा कि जिसने हर स्तर पर जातिवाद से लड़कर एक देश का संबिधान लिखने तक की मंजिल तय की हो । डॉ0 अम्बेडकर ने अपना सारा जीवन देश के गरीबो , पिछडो , दलितों और महिलाओ के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया , डॉ0 अम्बेडकर ने आज़ादी के बाद देश के नवनिर्माण में भी मुख्य भूमिका अदा की ,उनका देश को सबसे बड़ा सहयोग "भारत का संबिधान" है । भले ही उसमे से उनके कुछ मूल विचारो को हटा दिया गया था , फिर भी जैसा भी टूटा-फूटा है उस पर भी ईमानदारी से अमल कर लिया जाये तो बाबा साहेब का 50 प्रतिशत सपना पूरा हो सकता है , हालांकि अम्बेडकर खुद संबिधान को अपनी खास सफलता नहीं मानते थ...

नेता की जनता

भारत जब अंग्रेजो की गुलामी का दौर झेल रहा था तो उस समय कुछ देशभक्त सोच रहे थे की जिस दिन हमारा देश आज़ाद होगा उस दिन हमें असली ऑक्सीजन मिलेगी । और हम अपने नियम कायदे , अपने कानून बनाएंगे और देश में ऐसा सिस्टम होगा कि जब भी देश के हित की बात होगी तो प्रत्येक ब्यक्ति दोनों हाथ उठाकर उसका समर्थ करेगा । और ऐसा हुआ भी 15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद भी हुआ और हमारे लोगो ने अपने नियम ,कानून बनाये , पूरी दुनिया के सबसे अच्छे नियमो को इसमें रखा गया । उस समय ऐसा हुआ था की देश के सभी बुद्धिजीविओ को सामिल किया गया और देश निर्माण पर चर्चा हुई और  फिर न जाने अचानक ही कांग्रेस जिसका गठन देश को आज़ाद कराने के मकसद से  हुआ था के उस समय के मुखिया को देश का प्रधानमंत्री बना दिया , जरा सोचो जब कांग्रेस अपने मकसद में कामयाब हो गई थी तो उसको समाप्त क्यों नहीं कर दिया गया मगर ऐसा हुआ नहीं और नेहरू प्रधानमंत्री बन गए और सारे कानूनों को ताक पर रख अपने बजूद का खूब दुरपयोग करते नज़र आने लगे । फिर जब हद हो गयी तो इसी संगठन के खिलाफ देश ने नज़र उठाई तो देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया । और तभी से एक ट्रेंड सुरु ह...