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राष्ट्रभक्ति का चूरन

धर्म के क्षेत्र में भक्ति आत्मा की मुक्ति का साधन हो सकती है ; परन्तु राजनीति में भक्ति या नायक पूजा पतन और अंततः तानाशाही का सीधा रास्ता है       यह बात बाबा साहेब डॉ0 भीमराव ...

जब सिनेमा हॉल बन गया बॉर्डर

    चेन्नई शहर के एक थिएटर में रविवार शाम उस समय महौल गर्मा गया जब राष्ट्रगान के अपमान के आरोप में एक युवक और दो लड़कियों के साथ मारपीट की गई। जानकारी के मुताबिक, रविवार को ‘च...

26 अलीपुर रोड

साथियो आज दिल्ली में था , जयललिता ने 11.30pm पर आखिरी साँस ली खबर ने आँख खोली , शाम से ही सोच रखा था की कुछ अति आवश्यक कार्य होते हुए भी , #26_अलीपुर_रोड जहा बाबा साहेब ने आखिरी साँस ली थी , जह...

कनिका मिश्रा की नोटेबन्दी पर एक रिपोर्ट

Kanika Mishra लिखती है.. "ब्लैक मनी" का जुमला पुराना हुआ, अब नया नारा है "कैशलैस". आप को पता है क्यों? क्योंकि इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार 27 नवम्बर तक बैंकों में करीब १२ लाख क...

सिनेमा हॉल और राष्ट्रगान

 सिनेमाहाल और राष्ट्रगान कोई सम्बन्ध नज़र नहीं आता         बचपन से मैं यह देखता आ रहा हूँ की जब भी कही से राष्ट्रगान की आवाज़ कानो में पड़ती है तो पैर खुद-व-खुद ठहर जाते है , और स्कूल में मास्टर जी के बताये अनुसार की राष्ट्रगान इस भारत देश महान का प्रशस्ति गान है।  इसकी ध्वनि सुनते ही सावधान मुद्रा में खड़े होकर अभिवादन करना चाहिए में हम खड़े हो जाते है , और हा केवल खड़े ही नही होते वरन हमें एक गर्व की अनुभूति भी होती है । गर्व होता है अपने उन वीर सपूतो पर जिन्होंने अपना रक्त बहाकर हमें ये गौरव दिया । परंतु 30 नवम्बर 2016 को सुप्रीमकोर्ट का एक आदेश आया की सिनेमाहॉलो में फ़िल्म के सुरु होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जायेगा और पर्दे पर तिरंगा दिखता रहेगा । राष्ट्रभक्ति का ये एक नया तरीका जरूर हो सकता है , पर ये तरीका पूरी तरह सही है यह कहा नहीं जा सकता ।          सिनेमाहाल का इस्तेमाल लोग मनोरंजन के लिए इसी तरह करते है जिस प्रकार किसी दुकान का ग्राहक ख़रीददारी के लिए करता है , साली का मज़ाक के लिए करता है, अगर सा...

राष्ट्रभक्ति का चूरन

धर्म के क्षेत्र में भक्ति आत्मा की मुक्ति का साधन हो सकती है ; परन्तु राजनीति में भक्ति या नायक पूजा पतन और अंततः तानाशाही का सीधा रास्ता है       यह बात बाबा साहेब डॉ0 भीमराव ...

खतरे में क्यों...? अम्बेडकर

भारत रत्न बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर यह कोई एक नाम भर नहीं है , यह प्रतीक है इस देश के 60 करोड़ लोगो के सम्मान का , यह एक विषय है पूरी दुनिया के दलितों , गरीबो, मज़दूरों और महिलाओ के ...

खतरे में क्यों...? अम्बेडकर

भारत रत्न बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर यह कोई एक नाम भर नहीं है , यह प्रतीक है इस देश के 60 करोड़ लोगो के सम्मान का , यह एक विषय है पूरी दुनिया के दलितों , गरीबो, मज़दूरों और महिलाओ के अध्यायो का यह एक परिणाम है शिक्षा की शक्ति का और उस शक्ति के परिणाम का , जहा एक तरफ डॉ0 अम्बेडकर को पूरी दुनिया " सिंबल ऑफ़ नॉलेज" के नाम से संबोधित करती है , वही उनको आधुनिक भारत का जनक भी कहा जाता है । दूसरा कोई ऐसा विद्वान दुनिया में नहीं हुआ होगा कि जिसने हर स्तर पर जातिवाद से लड़कर एक देश का संबिधान लिखने तक की मंजिल तय की हो । डॉ0 अम्बेडकर ने अपना सारा जीवन देश के गरीबो , पिछडो , दलितों और महिलाओ के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया , डॉ0 अम्बेडकर ने आज़ादी के बाद देश के नवनिर्माण में भी मुख्य भूमिका अदा की ,उनका देश को सबसे बड़ा सहयोग "भारत का संबिधान" है । भले ही उसमे से उनके कुछ मूल विचारो को हटा दिया गया था , फिर भी जैसा भी टूटा-फूटा है उस पर भी ईमानदारी से अमल कर लिया जाये तो बाबा साहेब का 50 प्रतिशत सपना पूरा हो सकता है , हालांकि अम्बेडकर खुद संबिधान को अपनी खास सफलता नहीं मानते थ...

नेता की जनता

भारत जब अंग्रेजो की गुलामी का दौर झेल रहा था तो उस समय कुछ देशभक्त सोच रहे थे की जिस दिन हमारा देश आज़ाद होगा उस दिन हमें असली ऑक्सीजन मिलेगी । और हम अपने नियम कायदे , अपने कानून बनाएंगे और देश में ऐसा सिस्टम होगा कि जब भी देश के हित की बात होगी तो प्रत्येक ब्यक्ति दोनों हाथ उठाकर उसका समर्थ करेगा । और ऐसा हुआ भी 15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद भी हुआ और हमारे लोगो ने अपने नियम ,कानून बनाये , पूरी दुनिया के सबसे अच्छे नियमो को इसमें रखा गया । उस समय ऐसा हुआ था की देश के सभी बुद्धिजीविओ को सामिल किया गया और देश निर्माण पर चर्चा हुई और  फिर न जाने अचानक ही कांग्रेस जिसका गठन देश को आज़ाद कराने के मकसद से  हुआ था के उस समय के मुखिया को देश का प्रधानमंत्री बना दिया , जरा सोचो जब कांग्रेस अपने मकसद में कामयाब हो गई थी तो उसको समाप्त क्यों नहीं कर दिया गया मगर ऐसा हुआ नहीं और नेहरू प्रधानमंत्री बन गए और सारे कानूनों को ताक पर रख अपने बजूद का खूब दुरपयोग करते नज़र आने लगे । फिर जब हद हो गयी तो इसी संगठन के खिलाफ देश ने नज़र उठाई तो देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया । और तभी से एक ट्रेंड सुरु ह...

लोहिया की नज़र से

     डॉ राम मनोहर लोहिया देश के नेताओं में एक ऐसा नाम हैं, जिनकी सक्रियता और विचार-दृष्टि का असर आज भी देश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में है. यूपी में फैजाबाद जिले के अकबरपुर ...