विषय- आइये जाने भारत के राष्ट्रवादी ओजस्वी पुरुष भीमराव आंबेडकर के बारे जिन्हें आज बामसेफी/बहुजन/नमो बुधाय/जय भीम वालो ने इतना निचे गिरा दिया है की ये नाम अब स्वर्ण हिन्दू के लिए हिन्दू धर्म के लिए नफरत पैदा करता है आज इनकी छवि समाज में इतनी गिरा दी गयी है जैसे भारत में इन्होने ने ही हिन्दुओ का बटवारा किया। बाबा शाहब ने कुछ गलतिया जरुर की इन्शान थे गलतिया हो जाती है भगवान् नही थे बाबा शाहब जो गलती नही होगी फिर भी उनकी गलती इतनि बड़ी नही थी की दुरात्मा गाँधी से निम्न माने जाय और गाली दिए जाय। ये लेख उन महापुरुषों के लिए भी है जिन्हें जय भीम- जय मीम ( दलित मुस्लिम ) गठजोड़ पसंद है ये लेख उनके लिए भी जो कहते है बाबा शाहब हमेशा हिन्दुओ का विरोध किये और हिन्दू संस्कृति का विरोध किये आपको जानकार हैरानी होगी वो बाबा शाहब ही थे जो संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाना चाहते थे मगर प्रस्ताव् खारिज हो गया ||बाबा शाहब एक शुद्ध राष्ट्रवादी व्यक्ति थे|| ====================== हिंदुस्तान के बटवारे के वक्त एक दलित लीडर हुआ करते थे, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर से बड़े दलित लीडर …. जनाब का नाम था जोगेंद्र ना...