सिनेमाहाल और राष्ट्रगान कोई सम्बन्ध नज़र नहीं आता बचपन से मैं यह देखता आ रहा हूँ की जब भी कही से राष्ट्रगान की आवाज़ कानो में पड़ती है तो पैर खुद-व-खुद ठहर जाते है , और स्कूल में मास्टर जी के बताये अनुसार की राष्ट्रगान इस भारत देश महान का प्रशस्ति गान है। इसकी ध्वनि सुनते ही सावधान मुद्रा में खड़े होकर अभिवादन करना चाहिए में हम खड़े हो जाते है , और हा केवल खड़े ही नही होते वरन हमें एक गर्व की अनुभूति भी होती है । गर्व होता है अपने उन वीर सपूतो पर जिन्होंने अपना रक्त बहाकर हमें ये गौरव दिया । परंतु 30 नवम्बर 2016 को सुप्रीमकोर्ट का एक आदेश आया की सिनेमाहॉलो में फ़िल्म के सुरु होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जायेगा और पर्दे पर तिरंगा दिखता रहेगा । राष्ट्रभक्ति का ये एक नया तरीका जरूर हो सकता है , पर ये तरीका पूरी तरह सही है यह कहा नहीं जा सकता । सिनेमाहाल का इस्तेमाल लोग मनोरंजन के लिए इसी तरह करते है जिस प्रकार किसी दुकान का ग्राहक ख़रीददारी के लिए करता है , साली का मज़ाक के लिए करता है, अगर सा...