सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

दिसंबर, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्रभक्ति का चूरन

धर्म के क्षेत्र में भक्ति आत्मा की मुक्ति का साधन हो सकती है ; परन्तु राजनीति में भक्ति या नायक पूजा पतन और अंततः तानाशाही का सीधा रास्ता है       यह बात बाबा साहेब डॉ0 भीमराव ...

जब सिनेमा हॉल बन गया बॉर्डर

    चेन्नई शहर के एक थिएटर में रविवार शाम उस समय महौल गर्मा गया जब राष्ट्रगान के अपमान के आरोप में एक युवक और दो लड़कियों के साथ मारपीट की गई। जानकारी के मुताबिक, रविवार को ‘च...

26 अलीपुर रोड

साथियो आज दिल्ली में था , जयललिता ने 11.30pm पर आखिरी साँस ली खबर ने आँख खोली , शाम से ही सोच रखा था की कुछ अति आवश्यक कार्य होते हुए भी , #26_अलीपुर_रोड जहा बाबा साहेब ने आखिरी साँस ली थी , जह...

कनिका मिश्रा की नोटेबन्दी पर एक रिपोर्ट

Kanika Mishra लिखती है.. "ब्लैक मनी" का जुमला पुराना हुआ, अब नया नारा है "कैशलैस". आप को पता है क्यों? क्योंकि इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार 27 नवम्बर तक बैंकों में करीब १२ लाख क...

सिनेमा हॉल और राष्ट्रगान

 सिनेमाहाल और राष्ट्रगान कोई सम्बन्ध नज़र नहीं आता         बचपन से मैं यह देखता आ रहा हूँ की जब भी कही से राष्ट्रगान की आवाज़ कानो में पड़ती है तो पैर खुद-व-खुद ठहर जाते है , और स्कूल में मास्टर जी के बताये अनुसार की राष्ट्रगान इस भारत देश महान का प्रशस्ति गान है।  इसकी ध्वनि सुनते ही सावधान मुद्रा में खड़े होकर अभिवादन करना चाहिए में हम खड़े हो जाते है , और हा केवल खड़े ही नही होते वरन हमें एक गर्व की अनुभूति भी होती है । गर्व होता है अपने उन वीर सपूतो पर जिन्होंने अपना रक्त बहाकर हमें ये गौरव दिया । परंतु 30 नवम्बर 2016 को सुप्रीमकोर्ट का एक आदेश आया की सिनेमाहॉलो में फ़िल्म के सुरु होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जायेगा और पर्दे पर तिरंगा दिखता रहेगा । राष्ट्रभक्ति का ये एक नया तरीका जरूर हो सकता है , पर ये तरीका पूरी तरह सही है यह कहा नहीं जा सकता ।          सिनेमाहाल का इस्तेमाल लोग मनोरंजन के लिए इसी तरह करते है जिस प्रकार किसी दुकान का ग्राहक ख़रीददारी के लिए करता है , साली का मज़ाक के लिए करता है, अगर सा...