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26 अलीपुर रोड

साथियो आज दिल्ली में था , जयललिता ने 11.30pm पर आखिरी साँस ली खबर ने आँख खोली , शाम से ही सोच रखा था की कुछ अति आवश्यक कार्य होते हुए भी , #26_अलीपुर_रोड जहा बाबा साहेब ने आखिरी साँस ली थी , जहा दिन रात जागकर भारत के निर्माण की योजना बनाते बनाते एक युगपुरुष कही खो गया था वहा जरूर जाऊंगा , कार्य के बीच में 1 घंटे का समय मिला तो ऑटो पकड़कर पहुच , उस क्षेत्र में पहुचते ही बने एक गेट ने स्वागत किया , आगे जाकर एक एक मंच बना था उस पर लिखा था बाबा साहेब सम्मान दिवस सायद कुछ लोगो को सम्मान दिया जाना होगा , पूरा मंच एक विशेष राजनेतिक पार्टी के दलित नेताओ से पता पड़ा था, हा बाहर रोड साइड दलित महापुरुषों की तस्वीर जरूर बिक रही थी , वाही पर मेने एक सज्जन से पूछा की सर वो जगह कहा है जहा बाबा साहेब और उनकी पत्नी के साथ रहते थे , तो उन्होंने बताया की अब वो वगला तो नहीं रहा , उसे पूरी तरह से तोडा जा चुका है , आप अंदर जाकर देख सकते है की उसके स्थान पर नया बगला बनाया जा रहा है , जिसका प्लान आप नीचे तस्वीर में देख सकते है , अंदर जाकर देखा तो बाकई निर्माण कार्य चल रहा है , मुझे जानने की उत्सुकता हुई की मूल बिल्डिंग क्यों तोड़ दी गयी तो मुझे बताया गया की वह बिल्डिंग  टूट फूट चुकी थी ,
      जब बाबा साहेब कानून  मंत्री के पद से इस्तीफा दे चुके थे तो उनके पास दिल्ली में रहने की कोई जगह नहीं बची थी तब राजस्थान के सिरोही के राजा ने उनसे इस जगह पर रहने का आग्रह किया था , बाबा साहेब का उस दौर में ज्यादातर वक्त अध्ययन और लेखन कार्यों में ही गुजरता था। उनके पीए नानक चन्द्र रत्तू आमतौर पर उनके पास रहते थे। साहेब के गुज़र जाने के बाद उनकी पत्नी 3 सालो तक इसी आवास में रही , उसके बाद सिरोही के राजा ने बंगले को किसी मदन लाल जैन नाम के स्थानीय व्यापारी को बेच दिया। जैन ने आगे चलकर बंगले को स्टील व्यवसायी जिंदल परिवार को बेच दिया। फिर जिंदल परिवार इसमें रहने लगा। उसने बंगले में कुछ बदलाव भी किए। हलाकि जब बाबा साहेब इस बगले में रहते थे तब भी बगले के आस पास गंदगी रहती थी और बगला भी कुछ खास स्थिति में नहीं था , तब उस समय के देश के बड़े ब्यबसायी घनस्यमदास बिड़ला ने पुराने के स्थान पर नया मकान बनाकर बाबा साहेब को रहने के लिए देने को कहा तो बाबा साहेब ने कहा था की नहीं इस बगले को तो एक दिन मेरे समाज के लोग ही बनाएंगे , और बाबा साहेब की यह बात सच होती भी दिख रही है , कुछ दलित चिंतको के अथक प्रयास से  2003 की बीजेपी सरकार की सरकार ने इसको जिंदल परिवार से ख़रीद लिया और आंबेडकर मेमोरियल बनाने का निर्णय किया खुद अटल जी ने इसका उद्घाटन किया था ,
   बिल्डिंग के मुख्या द्वार पर एक गोश्ठी और चल रही थी जिसका सम्बोधन दिल्ली की ही राजनेतिक सपना अपने दिल में लोए दलित समाज की एक बड़ी IRS अफसर कर रही थी , हलाकि इस तरफ से रोड का नाम फ्लैग स्टैग रोड भी है जो अंग्रेजो का दिया हुआ नाम है , जिसके बगला नंबर 6 में दिल्ली के बर्तमान cm अरविन्द केजरीवाल रहते है , वहा लगे कुछ बैनरो पर लिखा भी था की केजरीवाल अपने बगले पर जबरदस्ती कब्ज़ा कर रखा है , आंबेडकर मेमोरियल बनाने हेतू बगला खली करो । कुछ दलित चिंतक कह भी रहे थे की देखो cm के घर के सामने ही लगाया है देख तो रहा ही होगा ,
     खेर में जिस मकसद से गया था की बाबा साहेब से सम्बंधित कुछ चीजे वहा होगी, देखकर जरूर आऊंगा वो कुर्सी, वो मेज , जहा संभिधान की भूमिका रांची गई , ऐसा वहा अभी तो कुछ नहीं है , हा नई बिल्डिंग बनते ही जल्दी ही ये कार्य भी किया जायेगा ऐसा लगता है ।

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