अपने स्वार्थ की खातिर देश के 60 सालो तक के जनता के विश्वाश को तोडना अच्छी बात नहीं।। जो लोग ये कह रहे है कि 60 सालो तक जनता को वेबकुफ़ बनाये रखा तो ये बहुत ही गलत और वाहियात जुमलेबाजी है।। ऐसा कहने बाले देश की 100 करोड़ जनता के विश्वाश और मानसिकता पर सवाल उठाते । मतलब वो लोग कहना चाहते है कि 100 करोड़ लोग दिमागी रूप से स्वस्थ नही थे जो ये नहीं जान पाये की उनको वेबकुफ़ बनाया जा रहा है।।
ये सब राजनेतिक जुमले होते है। जब्कि सच्चाई इससे कही अलग यह है कि आज़ादी के बाद देश को सवारने , बटोरने, सशक्त बनाने के कार्य इन्ही 60 सालो में हुए है ।। और ये कोई राजनेतिक विकाश नही ये विकाश था यहाँ के प्रत्येक ब्यक्ति का कठिन संघर्ष चाहे वो किसान हो, सैनिक हो, मजदूर हो, यहाँ के साइंटिस्ट हो , इंजीनियर हो या यहाँ के लेखक हो।। जिन्होंने जो अच्छा समझा वही किया।।
मान लो भविष्य में देश में किसी अन्य पार्टी की सरकार बनती है और वो कुछ आंकड़े निकालकर ये साबित कर दे कि पिछली सरकार ने जनता को वेवकूफ बनाया है तो जो आज की सरकार में श्रद्धा रखते है जिनकी संख्या आधे से ज्यादा है उसनी सोच आपके प्रति काया होगी।। जनता वेवकूफ नहीं होती साहब । बस अपने लिए विकाश करने वाले की तलासके सरकार बदलती रहती है।। और फिर बदलती है।।
और सरकार के कार्यो का प्रमाणपत्र जनता बनाती जरूर है ।। सबका बनता है।। आगे भी बनेगा।।। पास हुए तो सही वरना ग्रेस का मौका भी नहीं मिलता।।।
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