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दलित क्या है

दलित_क्या_है?
कुछ लोग पूछते है कि दलित क्या है? यह सवाल आजकल गैर_दलित_बुद्धिजीविओ के मन में बहुत आघात करता दिखता. असल में दलित शब्द का इस्तेमाल 19वीं शदी से ही होता आया है. इसका मतलब उन जातियो या समुदायों से रहा है जिनके साथ कही न कही, किसी न किसी स्तर पर अन्याय होता आया है.  इसका किसी धर्म विशेष से कोई सम्बन्ध नही है.  ये किसी भी धर्म के हो सकते है.

आज की सच्चाई यह है कि देश में लगभग 40% आबादी दलित आबादी है. जो अभी भी इसका असर झेल रही है. जिसको एक स्पेशल वर्ग(शूद्र) का नाम देकर दबाया गया था. आज जब वही खुद को दलित कहकर एक साथ इकठ्ठे चलने का बीड़ा उठा चुके है तो शूद्र लिखने वालो को समस्या क्या है? आज के ज़माने में दलित कोई अपमानित शब्द नही बल्कि एक संगठन का नाम हो चूका है. इसलिए कुछ गैर दलित बुद्धिजीवि दलितो को फुसलाते हुए कहते है कि आप लोगो के साथ कोई जुर्म नहीं हो रहा तो आप खुद को दलित क्यों कहते हो. तो इस पर मेरा दलित भाइयो से अनुरोध है कि ये आपके हित की बात नहीं करते बल्कि आपके संगठन को कमजोर करना चाहते है. इनको मालूम है कि दलित शब्द के नाम पर दुनिया की शोषित , #मजलूम आवादी एक साथ जुडी चली आती है. और ऐसा करने में उनका कुछ सहयोग हमारे लोग भी कर रहे है. उन चमचो पर ध्यान दिए बिना अपना ज्ञान लगाना है. जो आज के समय की मांग भी है. उनको शूद्र कहने में कोई आपत्ति नहीं क्योकि शूद्र की परिभाषा गुलामी है और दलित से उनका कलेजा इसलिए  फटता ही की दलित की परिभाषा अधिकार और संगठन  है....
                    @yashpal

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