नई दिल्ली : विधानसभा चुनावों में तीन हिंदीभाषी राज्यों में बीजेपी की हार के बाद आगामी लोकसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि फरवरी में अंतरिम बजट के दौरान वित्तमंत्री अरुण जेटली एक अनूठी घोषणा कर सकते हैं। ये घोषणा है यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) की। इसके तहत हर परिवार के हरेक सदस्य को 10 हजार प्रति महीने या फिर एकमुश्त दी जा सकती है, जिसे यूबीआई यानी बुनियादी आमदनी के तौर पर जाना जाता है।
फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग भी इसके बड़े समर्थक हैं। उनका मानना है कि यूबीआई से उन लोगों को काफी मदद मिल सकती है जो मशीन के चलते नौकरी खो चुके हैं। क्या है यूबीआई, क्या भारत इस राजस्व बोझ के लिए तैयार है और दुनिया के किन देशों में यूबीआई लागू है, इसपर एक पड़ताल। क्या हैं यूबीआई के मायने : सबसे पहले साल 1967 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने गारंटीड इनकम का आइडिया दिया ताकि आय की असमानता कम हो सके। वैसे ये एक सरकारी योजना है, जिसके तहत किसी देश की सरकार अपने हर नागरिक को हर महीने एक निश्चित रकम देती है। साल 2016-17 के आर्थिक सर्वे में इस योजना की सिफारिश की गई थी। कहा गया कि इससे गरीबी हटाने में मदद मिलेगी।
फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग भी इसके बड़े समर्थक हैं। उनका मानना है कि यूबीआई से उन लोगों को काफी मदद मिल सकती है जो मशीन के चलते नौकरी खो चुके हैं। क्या है यूबीआई, क्या भारत इस राजस्व बोझ के लिए तैयार है और दुनिया के किन देशों में यूबीआई लागू है, इसपर एक पड़ताल। क्या हैं यूबीआई के मायने : सबसे पहले साल 1967 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने गारंटीड इनकम का आइडिया दिया ताकि आय की असमानता कम हो सके। वैसे ये एक सरकारी योजना है, जिसके तहत किसी देश की सरकार अपने हर नागरिक को हर महीने एक निश्चित रकम देती है। साल 2016-17 के आर्थिक सर्वे में इस योजना की सिफारिश की गई थी। कहा गया कि इससे गरीबी हटाने में मदद मिलेगी।


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