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राष्ट्रगान

सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि सिनेमा हॉल में मूवी से पहले राष्ट्रगान बजेगा और सभी को उसके सम्मान में साबधान मुद्रा में खड़ा होना होगा , अब देखिए ये एक आदेश था कानून था पर आज जब मेने दंगल मूवी देखी तो पता चला की देशभक्ति का असली मतलब क्या है। जब मूवी समाप्ति की तरफ थी तो उसकी नायिका जो भारतीय महिला रेसलर का किरदार निभा रही थी , ने जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलो में गोल्ड मैडल की दावेदारी शुनिषित कर ली तब गोल्ड मैडल जीतने बाली खिलाडी के सम्मान में उसके देश का राष्ट्रगान बजाना होता है । और फिर जेसे ही सिनेमा हॉल में जन-गण-मन के संगीत  की ध्वनि कानो में पड़ी तो सभी लोग अचानक ही साबधान मुद्रा में खड़े हो गए , तब में इस निष्कर्ष पर पंहुचा  कि कोर्ट के आदेश बाला राष्ट्रगान और मूवी में बजाये ये गए राष्ट्रगान(जो केवल संगीत मात्र था) में ये फर्क था की आदेश बाले को सुरु करने से पहले खड़े होने की एक सूचना पर्दे पर लिखकर आयी थी तब लोग खड़े हुए थे परंतु मूवी में बजने बाले राष्ट्रगान में किसी ने भी खड़े होने की अपील तक नहीं की , फिर भी लोग ज्यादा उत्साह के साथ खड़े थे ।
   तब मुझे लगा अगर मूवी दंगल जेसी हो तो सुप्रीम कोर्ट को अपना समय बर्बाद करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी और लोगो से ये सबूत लेने की आवश्यकता भी नहीं की आप सच्चे देशभक्त हो या नहीं , क्योकि यहाँ तो हर किसी के अंदर देशभक्ति कूट कूट कर भरी है ।
      ( ये मेरा खुद का मानना है)

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