#Roshmitha_Harimurthy अंबेडकरी समाज को तुम पर गर्व है.जातीय वर्जनाओं में फंसी उस अयोग्यता के मिथक को तोड़ा है जिसने हमारी प्रतिभाओं को हतोत्साहित करने का विरोधी कार्य किया है. तुमने जो बोला है कि "मेरे रोल मॉडल बाबा साहेब अंबेडकर हैं क्योकि उन्होंने पिछड़ों को अधिकार दिलाने के लिए अपना सारा जीवन लगा दिया और मैं भी उसी समाज से सम्बन्ध रखती हूँ।"
तुम्हारा ये बयान सुनकर लगा की आज भीम की बेटी भी मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने की कूवत रखती है , पूरा देश तुम्हारे साथ है . नाज है देश को तुम पर.
पर मेरे मन में एक बात घर कर गयी है कि तुमने जिस महामानव को अपना रोल मॉडल बताया है उससे देश के करोड़ों लोगो की भावनायें जुडी हैं . ये वो लोग है जो अगर किसी को एक बार आँखों पर बिठा ले तो सारी उम्र उतरने नहीं देते, परंतु पिछले ही दिनों इस भावनात्मक समाज को बहुत तकलीफ का सामना करना पड़ा जब टीना की शादी की खबर इन्होंने सुनी. एक झटके में टीना की टॉपरी धूल में मिला दी। बस आपसे विनती है कि टीना डाबी मत बन जाना . दोहराना मत उसकी नापाक हरकत को, हालांकि ये गलत हाे या सही , यह उनका निजी मसला था लेकिन यह सामाजिक इसलिए था कि समाज को उनसे बहुत उम्मीदें थीं . आप देखना तो एक बार ,अरे इतना प्यार है इनके पास कि एक पत्थर को देवता बनाने तक की शक्ति रखता है ये समाज।
बस मुझे इतना ही कहना था।
I wish u all the best...#रोशमिथा_हरिमूर्ति
कुछ लोग मुझे अन्तर्धर्म विवाह विरोधी कह सकते है. इसकी मुझे चिंता नहीं , क्योंकि मेरी भवनायें आहत हुई हैं . अगर मेरे इस लेख से उनको दुःख पहुचे तो मुझे फर्क नहीं।
ये मेरे अपने विचार है (यशपाल सिंह)
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ओशो आंबेडकर चाहते थे कि अछूतो के अपने उम्मीदवार और अपने निर्वाचन क्षेत्र हों, अन्यथा उनका कहीं भी किसी भी संसद में प्रतिनिधित्व कभी नहीं होगा, भारत में एक मोची अछूत है, कौन एक मोची को वोट देंगे? कौन उसे वोट देने जा रहा है? अम्बेडकर बिल्कुल सही थे। देश की एक चौथाई लोग अछूत है। स्कूलों में जाने के लिए उन्हें अनुमति नहीं है, अन्य छात्र उनके साथ बैठने के लिए तैयार नहीं है, कोई शिक्षक उन्हें सिखाने के लिए तैयार नहीं है। सरकार कहती है कि सरकारी स्कूल खुले हैं , लेकिन वास्तविकता में कोई एक अछूत छात्र कक्षा में प्रवेश करता है, तो सभी तीस छात्रों कक्षा छोड़ने को …. तैयार है। शिक्षक वर्ग कक्षा छोड़ देता है, तो फिर कैसे इन गरीब लोगों का — जो इस देश का एक चौथाई भाग हैं – प्रतिनिधित्व किया जा रहा है? इसलिए उन्हें अलग निर्वाचन क्षेत्र दिए जाने चाहिए। जहां केवल वे खड़े हो सकते हैं और केवल वे मतदान कर सकते हों, अम्बेडकर पूरी तरह से तार्किक और पूरी तरह से मानवतावादी थे। लेकिन गांधी, अनशन पर चला गया “उन्होंने कहा कि अम्बेडकर हिंदू समाज के भीतर एक प्रभाग बनाने की कोशिश कर रहे है।” विभाजन दस...
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